जहां चाह वहां राह
कहते हैं जब मन में ठान लें तो रास्ते अपने आप बन जाते हैं
ठीक कुछ ऐसा ही दिल्ली में हो रहा है दिल्ली में, जब से अरविंद केजरीवाल सत्ता में आए हैं तब से आम आदमी का जीवन शुलभ कैसे बने इस पर काम कर रहे है और बहुत कुछ करके दिखाया भी है चाहे वो मोहल्ला क्लिनिक हो या सरकारी स्कूलों को निजी स्कूलों से भी शानदार बनाना या फिर डोर स्टेप डिलीवरी (सेवाएं आपके द्वार) हर कदम जो आम आदमी पार्टी की सरकार ने उठाया है उनमे कही ना कही ये सन्देश देने की कोशिश की है अब दिल्ली में एक ऐसी सरकार है जो आम आदमी के लिए काम कर रही है किसी ख़ास आदमी के लिए नहीं।
दिल्ली की बसावट बहुत पुरानी है, कुछ गलियां तो इतनी तंग है की वहां पर इमरजेंसी के समय एम्बुलेंस तक नहीं जा सकती है और ये सच में बहुत बड़ी समस्या है/थी। अब या तो सभी इमारतों को तोड़कर रास्ते चोडे किये या फिर इस समस्या का कोई व्यवहारिक समाधान निकाला जाए।
इसका समाधान निकला "बाइक एम्बुलेंस"
"अभी तक बड़ी-बड़ी गाड़ियों में एम्बुलेंस होती थी जो की तंग गलियों में नहीं जाया करती थी।
आज से #शुरू की गई है, जो की तंग गलियों के अंदर भी जाएगी, और लोगों को तुरंत सेवा मिलेगी।
यह दिल्ली के लोगों के लिए प्राथमिक उपचार में एक बड़ा कदम है"-@ArvindKejriwal
अब तंग गलियों में मेडिकल इमरजेंसी में ये बाइक एम्बुलेंस आसानी से पहुंचकर समय पर सही इलाज देकर जान बचा सकती है।
इसके कहते है सच में आम आदमी की परवाह करना, बिना किसी दिखावे या शोर शराबे या फिर दूसरों पर आरोप लगाने (जैसा की अक्सर हमारे प्रधानमंत्री जी कर रहे है कभी पिछले 70 का रोना रोते रहते है तो कभी नेहरू गाँधी को कोसते रहते है या फिर विपक्ष जो की बचा ही नहीं उसे ही कोस लेते है की वो उन्हें काम नहीं करने दे रहा) के बजाय दिल्ली में अरविन्द केजरीवाल काम करके दिखा रहे है।