mercoledì 15 maggio 2019

जिसका डर था वही हुआ


लाख कोशिश की, तरह तरह के षडयंत्र रचे, हर तरीके से प्रताड़ित किया गया, अपनी आईटी सेल के द्वारा छवि ख़राब करने की दिन रात कोशिश की गई, लेकिन जिसका डर था वही हुआ!

यही डर था जिस वजह से दिल्ली की केजरीवाल सरकार के हर काम में रोड़ा लगा रही है केंद्र में बैठी मोदी सरकार।

ओर तो ओर केजरीवाल सरकार अपने कामों को पूरे देश में अख़बार/टीवी पर विज्ञापन के जरिये पहुँचाना चाहती थी उस पर भी केंद्र सरकार द्वारा अफसरों को डरा धमका कर रोक लगा दी क्योंकि उन्हें डर था की अगर केजरीवाल सरकार के काम काज देश की जनता के बीच पहुँच गए तो देशभर से यही आवाज उठेगी।

"केजरीवाल सरकार दिल्ली में कर सकती है तो हमारी सरकार हमारे यहाँ क्यों नहीं करती?" 

लेकिन वो कहते है ना "सत्य और ख़ुश्बू को कितना भी दबाया जाए कहीं न कहीं से बाहर आ ही जाता है।"

आज राजस्थान से भी आवाज उठी है

"जब दिल्ली में प्राइवेट स्कूलों पर हो सकती है कार्यवाही तो यहाँ क्यों नहीं?" 

ये वो थप्पड़ है जो केजरीवाल मारता है। और इसकी गूँज दूर-दूर तक सुनाई देती है
पूरा देश शिक्षा-माफ़िया से परेशान है।
प्राइवेट स्कूल के नाम पर लूट का धंधा आराम से चल रहा है। कोई रोक-टोक नहीं, कोई नियम-कानून नहीं। नेता कान में तेल डालकर सो रहे हैं, बच्चों का भविष्य बर्बाद हो रहा है, माँ-बाप फ़ीस भर-भरके दुखी हो चुके हैं।

लेकिन एक ज़रा-सा राज्य है दिल्ली जहाँ अरविन्द केजरीवाल, मनीष सिसोदिया और आतिशी की टीम ने महज़ चार साल में शिक्षा-व्यवस्था में क्रान्तिकरी बदलाव कर दिया है। एक तरफ़ सरकारी स्कूल चमक उठे हैं और दूसरी तरफ़ प्राइवेट स्कूलों की लूट पर शिकंजा कस दिया है।

फ़ेसबुक और व्हाट्सऐप्प पर केजरीवाल का मज़ाक बनाने वाले लोग घटिया प्राइवेट स्कूलों की फ़ीस भरते वक़्त बहुत रोते हैं। करो जाति और धर्म की राजनीति। बँधे रहो खूँटे से जिसपे तुम्हारे बाप-दादा बँधे थे। बने रहो नेताओं के गुलाम। लगाओ उनके जुलूस में नारे। करो बच्चों का भविष्य बर्बाद। पीने के लिए पानी नहीं है क्षेत्र में लेकिन नेता के साथ सेल्फी लगाकर यह ज़रूर देखो कि फ़ेसबुक पर कितने लाइक मिले।

और हाँ,  केजरीवाल का मज़ाक उड़ाने वालों जब तुम उन पर हँसोगे तब हमें तुम्हारे बच्चों पर बहुत तरस आएगा।

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